कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने कहा कि किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों एवं पारंपरिक बुनकरों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके उत्पादों को बेहतर बाजार से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने नाबार्ड, जिला प्रशासन, बैंकों, विभिन्न विभागों तथा किसान उत्पादक संगठनों के समन्वित प्रयासों से जिले में ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को और गति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों को संस्थागत ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

कलेक्टर श्री गुप्ता आज सिरोंज एवं विदिशा क्षेत्र में नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक श्री गोवर्धन सिंह रावत के मुख्य आतिथ्य में आयोजित विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के शुभारंभ एवं सामग्री वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण उद्यमियों एवं बुनकरों के लिए विभिन्न गतिविधियों का शुभारंभ किया गया तथा ऋण सहायता एवं आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया।

खास बातें

  • कार्यक्रम में पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड ( KCC) भी वितरित किए गए।
  • कार्यक्रम में पात्र स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पशुपालन गतिविधियों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए गए।
  • कार्यक्रम के दौरान भारतीय स्टेट बैंक द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसानों को कुल 21 करोड़ रुपये का ऋण वितरण (क्रेडिट लिंकेज) किया गया।

कार्यक्रम में नाबार्ड, क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती, महाप्रबंधक श्रीमती अंविता सुरीन एवं श्री एस.सी. साहू सहित नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक ( DDM) विदिशा श्रीमती जगप्रीत कौर साबरवाल, अग्रणी जिला प्रबंधक ( LDM) श्री बघेल, भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री धीरज राय, मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक की क्षेत्रीय प्रबंधक श्रीमती रेखा तिवारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन ( FPO), स्वयं सहायता समूहों तथा अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान जन कल्याण एफपीओ द्वारा तैयार जौ के आटे तथा राम जानकी एफपीओ द्वारा तैयार शरबती गेहूं के आटे का शुभारंभ किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य किसानों के उत्पादों का मूल्य संवर्धन करते हुए उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।

गंजबासौदा एफपीओ को भारतीय स्टेट बैंक द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए ऋण स्वीकृत किया गया। वहीं तारावली एफपीओ को नाबार्ड द्वारा मोबाइल मिल्क चैन प्रदान की गई। कार्यक्रम में पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड ( KCC) भी वितरित किए गए।

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी केसीसी की सुविधा

कार्यक्रम में पात्र स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पशुपालन गतिविधियों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए गए। इन प्रकरणों में मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक द्वारा क्रेडिट लिंकेज किया गया। इस पहल में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ( SRLM) एवं पशुपालन विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इसके माध्यम से पशुपालकों एवं महिला हितग्राहियों को संस्थागत ऋण सुविधा से जोड़ने की दिशा में पहल की गई है।

बुनकरों को करघे एवं उत्पादन उपकरण वितरित

सिरोंज के पारंपरिक हथकरघा बुनकरों द्वारा दरी एवं रग निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नाबार्ड समर्थित कार्यक्रम के अंतर्गत नीति आयोग के सहयोग से बुनकरों को करघे एवं अन्य आवश्यक उत्पादन उपकरण वितरित किए गए। साथ ही बुनकरों को डिजिटल मार्केटिंग सहायता उपलब्ध कराने की पहल की गई, जिससे उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के अवसर उपलब्ध हो सकें।

एसबीआई ने किसानों को 21 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया

कार्यक्रम के दौरान भारतीय स्टेट बैंक द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसानों को कुल 21 करोड़ रुपये का ऋण वितरण (क्रेडिट लिंकेज) किया गया। इससे कृषि एवं संबंधित गतिविधियों के लिए किसानों को संस्थागत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।

सिरोंज में आयोजित कार्यक्रम के उपरांत नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक श्री गोवर्धन सिंह रावत ने देवखजुरी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति ( PACS) का निरीक्षण किया। उन्होंने समिति द्वारा संचालित गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान ग्रामीण वित्तीय समावेशन, कृषि अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली गई।

ग्रामीण विकास के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर

अपने संबोधन में नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक श्री गोवर्धन सिंह रावत ने कहा कि नाबार्ड का उद्देश्य किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण उद्यमियों एवं बुनकरों को वित्तीय, तकनीकी एवं विपणन सहायता उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में विकास की गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन, बैंकिंग संस्थाओं, सरकारी विभागों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं से समन्वित प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण विकास को गति देने तथा किसानों एवं ग्रामीण हितग्राहियों को योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।

विदिशा जिले में नाबार्ड की विभिन्न विकास पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन, विभागों, बैंकों, किसान उत्पादक संगठनों, किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों के साथ समन्वय स्थापित करने में नाबार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।