जिले के सिरोंज वन परिक्षेत्र की देवपुर बीट में वन विभाग द्वारा वन संरक्षण, अतिक्रमण मुक्ति, वृक्षारोपण और जल संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों ने क्षेत्र को एक नई पहचान दी है। वर्षों से अतिक्रमण के कारण प्रभावित लगभग 100 हेक्टेयर शासकीय वन भूमि को विधि-सम्मत कार्रवाई के माध्यम से अतिक्रमण मुक्त कराकर उसके पुनरुद्धार की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया गया है।
100 हेक्टेयर वन भूमि को कराया अतिक्रमण मुक्त
देवपुर बीट क्षेत्र में लंबे समय से लगभग 100 हेक्टेयर शासकीय वन भूमि पर अतिक्रमण कर कृषि कार्य किया जा रहा था। इसके कारण प्राकृतिक वन क्षेत्र प्रभावित होने के साथ ही वन्यजीवों के आवास, मिट्टी की गुणवत्ता तथा प्राकृतिक जल संरक्षण व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था।
खास बातें
- देवपुर बीट क्षेत्र में लंबे समय से लगभग 100 हेक्टेयर शासकीय वन भूमि पर अतिक्रमण कर कृषि कार्य किया जा रहा था।
- वन विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर नियमानुसार कार्रवाई की गई और लगभग 100 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
- अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर हरियाली लौटाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया।
वन विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर नियमानुसार कार्रवाई की गई और लगभग 100 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इसके बाद इस क्षेत्र को पुनः हरित एवं पर्यावरणीय रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए योजनाबद्ध कार्य प्रारंभ किए गए।
50 हजार पौधों से बदला वन क्षेत्र का स्वरूप
अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर हरियाली लौटाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया। क्षेत्र में लगभग 50 हजार पौधे रोपे गए हैं। स्थानीय पर्यावरण एवं परिस्थितियों के अनुकूल बांस, खैर और पीपल जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है।
वृक्षारोपण से जहां वन क्षेत्र के पुनरुद्धार को गति मिली है, वहीं भविष्य में यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए बेहतर प्राकृतिक आवास तथा स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जल संरक्षण संरचनाओं से वर्षा जल का संरक्षण
देवपुर बीट में वन भूमि के पुनरुद्धार के साथ जल संरक्षण को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। मध्य प्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान, केंद्र सरकार की अमृत सरोवर योजना तथा जल शक्ति अभियान-कैच द रेन के उद्देश्यों के अनुरूप वर्षा जल को रोकने और भूजल स्तर में सुधार के लिए विभिन्न जल संरचनाएं विकसित की गई हैं।
क्षेत्र में बोल्डर चेक डैम, स्टॉप डैम और परकोलेशन टैंक जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इन संरचनाओं से वर्षा के पानी को क्षेत्र में रोकने, मिट्टी के कटाव को कम करने और भूजल पुनर्भरण में मदद मिल रही है।
देवपुर बीट में किए गए कार्यों का प्रभाव क्षेत्र के Before और After छायाचित्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जहां पहले सूखी, लाल एवं बंजर भूमि दिखाई देती थी, वहीं अब उसी क्षेत्र में हरियाली विकसित हो रही है और जल संरक्षण संरचनाओं में पानी का संचय दिखाई दे रहा है।
यह बदलाव केवल भूमि के स्वरूप में परिवर्तन नहीं, बल्कि वन भूमि के वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध पुनरुद्धार का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
वन्यजीवों और स्थानीय ग्रामीणों को मिला लाभ
जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण के कार्यों से देवपुर बीट में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। जल संरचनाओं में पानी उपलब्ध रहने से वन्यजीवों को प्राकृतिक क्षेत्र में ही जल की सुविधा प्राप्त होगी तथा विकसित होती वनस्पति से चारे की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
वहीं, वन विभाग द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों से स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए हैं। क्षेत्र में चारे की उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय पशुपालकों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ भविष्य की मजबूत नींव
देवपुर बीट की यह पहल वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तक सीमित नहीं है। अतिक्रमण मुक्त भूमि पर वृक्षारोपण, जल संरचनाओं का निर्माण, वर्षा जल का संरक्षण और प्राकृतिक आवास के पुनरुद्धार के माध्यम से यहां पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा का समन्वित मॉडल विकसित हुआ है।
देवपुर बीट आज यह संदेश दे रही है कि यदि शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय प्रयास और स्थानीय सहभागिता एक साथ हो तो बंजर और प्रभावित भूमि को भी पुनः हरित एवं जीवनदायी स्वरूप प्रदान किया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण की मजबूत नींव तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




