औद्योगिक क्षेत्रों के विकास सहित रोजगार के अवसर बढाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई एमएसएमई नीति सरकार की सर्वाधिक कामयाब नीतियों में से एक बन गई है। सरकार द्वारा नीति के तहत उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और त्वरित कार्य प्रणाली से इस नीति का प्रभाव धरातल पर तेजी से बढ रहा है। इसका असर चहुओर देखने को मिल रहा है। श्योपुर जिले की ही बात करें तो पिछले एक साल में यहां 200 करोड़ रूपये का निवेश हुआ है, जो कि सरकार की इस योजना और नीति की सफलता को बताता है।

शासन द्वारा वर्ष 2025 में एमएसएमई प्रोत्साहन नीति लागू की गई, जिसके तहत उद्योग विकसित करने के लिए तमाम तरह की सुविधाएं एक ही स्थान पर प्रदाय करने के लिए सिंगल विडों जैसे कॉन्सेप्ट शुरू किये गये, प्रत्येक जिलें में निवेश प्रोत्साहन केन्द्र बनाये गये और कलेक्टर की अध्यक्षता में नियमित बैठकों की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई।

खास बातें

  • शासन के निवेश प्रोत्साहन से प्रोत्साहित होकर वर्तमान में 03 राइस मिल संचालित है और 03 स्थापनाधीन है।
  • वर्तमान में 03 राइस मिलों से 32 टन प्रति घंटे धान की प्रोसेसिंग होती है।
  • एक्सपोर्ट पर भी शासन द्वारा 2 से 3 प्रतिशत अलग से अनुदान दिया जाता है।

विभिन्न प्रकार के उद्योग लगानें में उद्यमियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पोर्टल की व्यवस्था शुरू की गई और विभिन्न आवश्यक अनुमतियों, एनओसी के लिए समयबद्व प्रक्रिया को पारदर्शिता पूर्ण तरीके से लागू किया गया। इसका असर यह हुआ कि बडी संख्या में औद्योगिक इकाईयों की स्थापना का कार्य शुरू हुआ, और युवा उद्यमियों ने भी अपने स्टार्टअप शुरू करने में रूचि दिखाई।

दूरस्थ श्योपुर जिले में औद्योगिक विकास अपने आप में सरकार की इस उद्योग नीति की सफलता का प्रमाण है, जहां पिछले एक वर्ष में लगभग 200 करोड रूपये का निवेश एमएसएमई अंतर्गत हुआ है। कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा द्वारा लगातार मॉनीटरिंग और औद्योगिक विकास के लिए उद्यमियों के साथ नियमित चर्चा एवं बैठके और औद्योगिक इकाईयों के भ्रमण ने नये उद्योगों की स्थापना को गति दी है।

एमएसएमई नीति-2025 अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम की इकाईयों की स्थापना के लिए 40 से 48 प्रतिशत तक अनुदान शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है, इसमें भी 10 करोड से अधिक लागत की फूड प्रोसेसिंग इकाईयों को अनुदान राशि की डेढ गुना राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी जाती है।

चूकि श्योपुर एक कृषि प्रधान जिला है, तथा यहां धान का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है। औसतन हर वर्ष एक लाख हेक्टयर में धान का उत्पादन होता है, धान के बंपर उत्पादन को देखते हुए उद्यमियों द्वारा राइस मिल लगाने की शुरूआत की गई और पहले केवल एक राइस मिल लगाई गई। शासन के निवेश प्रोत्साहन से प्रोत्साहित होकर वर्तमान में 03 राइस मिल संचालित है और 03 स्थापनाधीन है।

श्योपुर जिले में राइस मिल की स्थापना से न केवल धान उत्पादक किसानों को बेहतर दाम मिलना सुनिश्चित हुआ है, साथ ही इन इकाईयों के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे है। वर्तमान में 03 राइस मिलों से 32 टन प्रति घंटे धान की प्रोसेसिंग होती है।

श्री राधेकृष्णा इंडस्ट्रीज, श्री राधेरमण राइस एक्सपोर्ट प्रायवेट लिमिटेड तथा यूनिवर्सल फूड इंडस्ट्रीज संचालित है तथा देवरी बालाजी फूडर्स, नाथजी राईस लैंड एवं क्षेत्रपाल राइस इंडस्ट्रीज का निर्माण कार्य चल रहा है। यूनिवर्सल फूड इंडस्ट्रीज द्वारा तो 28 करोड रूपये का चावल एक्सपोर्ट भी किया गया है। इस प्रकार श्योपुर चावल उत्पादन और प्रोसेसिंग के लिए निरंतर आगे बढ रहा है।

एक्सपोर्ट पर भी शासन द्वारा 2 से 3 प्रतिशत अलग से अनुदान दिया जाता है।

राधेरमण राइस एक्सपोर्ट प्रायवेट लिमिटेड श्योपुर के एमडी श्री ओमप्रकाश मीणा बताते है कि सीजन के दौरान उनकी राइस मिल में 12 टन प्रति घंटे चावल की प्रोसेसिंग होती है। चावल से निकले धान के छिलके का उपयोग बॉयलर के संचालन में किया जाता है और शेष धान छिलका जो कि वेस्ट मटेरियल होता है, को ब्रेकिट्स बनाने वाली इकाईयों को विक्रय कर दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि पूरा प्लांट ऑटोमैटिक है तथा 30 करोड की लागत से स्थापित किया गया है। इसका संचालन पैनल रूम से किया जाता है, सभी मशीनों पर सेंसर लगे है, जरा भी तकनीकी खराबी आती है तो ऑटोमैटिक प्लांट बंद हो जाता है। उन्होंने बताया कि चावल की लम्बाई के हिसाब से ग्रेडिंग की जाती है, इसके साथ ही कलर, सौरटेक्स मशीने भी लगी है।

अभी बल्क में पूरा चावल दिल्ली और गांधीधाम पोर्ट पर जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रीन एर्न्जी के तहत प्लांट के लिए 500 किलोवॉट का सोलर प्लांट भी लगाया गया है।

वे कहते है कि एमएसएमई नीति से उद्यमियों को बहुत लाभ मिला है, जिससे लगातार यूनिट की स्थापना हो रही है, धान की यूनिट लगाने में 60 प्रतिशत तक का अनुदान सरकार द्वारा दिया जा रहा है, औद्योगिक विकास के लिए इससे बेहतर नीति ओर क्या हो सकती है।